1. माँ
के दूध से दें बच्चों को सुपरसॉनिक ब्रेन/ फीडिंग कराये और फिट रहें
माँ बनना किसी भी महिला के
लिए एक सम्म्मानीय अवस्था
है. यह प्रकृति का सर्वोत्तम
उपहार है। शिशु के
जन्म के साथ ही
माँ के कंधो पर
बहुत सी जिम्मेदारियां आ
जाती है जिसमे से
एक है शिशु के
लिए पोषण उपलब्ध कराना।
प्रसव के
बाद माँ का दूध बच्चे का
पहला आहार होता है।
यह शिशु के जन्म लेने से उसके बड़े
होने तक में उसके
चहुँमुखी
विकास में मददगार होता
है। ऐसा माना जाता है की जिन
बच्चों ने लम्बे समय
तक स्तनपान किया होता है उनमे
मानसिक विकास तेज़ी से होता हैऔर
वो अधिक बुद्धिमान भी होते है।
पोषक तत्वों से भरपूर माँ
के दूध में वो सारी खूबियां है
जो बच्चे को तमाम
बिमारियों से दूर रखती
है। मनोवैज्ञानिक भी मानते है
की स्तनपान से शिशु
और माँ के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता है जिससे बच्चा माँ की गंध
को जल्दी पहचानने लगता है।
आज
की भाग- दौड़ भरी ज़िंदगी में काम- क़ाज़ी महिलाओ के लिए नियमित रूप से स्तनपान
कराना संभव
नहीं। स्तनपान
न करने से बच्चे के
शारीरक और मानसिक विकास
पर प्रतिकूल असर पड़ता है। नियमित रूप से न सही कम
से कम हफ्ते में
एक या दो बार
शिशु को स्तनपान
ज़रूर करना चाहिए ताकि बच्चे की रोग प्रतिरोधक
क्षमता का विकास हो
और उसके शरीर को सारे पोषक
तत्व प्राप्त हो सके। स्तनपान
न सिर्फ शिशुओं के लिए बल्कि
माँओ के लिए
भी बहुत फायदेमंद
है। इस अमृत की
तुलना दुनिया के किसी भी
पौष्टिक आहार
से नहीं की जा सकती।
स्तनपान के अनेको लाभ
है और इन
लाभों को आप तक
पहुंचा रही है - डॉक्टर दर्शनी
प्रिय
स्तनपान के है बड़े फायदे
1 1. करे
शिशु का दिमाग तेज़ :-
माँ
के दूध में प्राकृतिक तौर पर डी एच एच ए पाया
जाता है जो दिमाग को चुस्त और तेज़ बनता है। इससे शिशु को भावनात्मक
सुरक्षा का एहसास होता है जिससे मस्तिष्क के
उचित विकास में सहायता मिलती है। स्तनपान
न करने की तुलना में स्तनपान करने वाले बच्चे समूह और स्कूल में
बेहतर प्रदर्शन करते है।
2. रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास
माँ का दूध पौषिटक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें मौजूद तत्व हानिकारक माइक्रो ऑर्गैनिज़्म को नष्ट कर गुड एन्ज़ाइम बढ़ाते
है जो बच्चे की सर्दी ,ज़ुकाम और अन्य संक्रमित
बीमारियों से रक्षा करता है। यह एक तरह से बच्चे का सुरक्षा कवच है जो भविष्य में होने
वाली गंभीर बीमारयों से लड़ने में उसकी मदद करता है। माँ के स्तन से पहली बार निकलने वाला गाढ़ा पीले रंग
का द्रव्य कोलेस्ट्रॉल कहलाता है यह संक्रमण
से बचाने और प्रतिरोधक क्षमता मज़ूबत करने में मदद करता है .
3. दांत और जबड़े
को
दे
मज़बूती :-
शिशु का मुँह
स्तन से दूध पीने के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल होता है। इस प्रक्रिया से बच्चे का मुँह
ठीक तरह से विकसित होता है। इससे दांत
निकलने में सहायता मिलती है। बच्चों
के जबड़े न केवल मज़बूत होते है बल्कि आगे चलकर दांत निकलने में उन्हें कोई परेशानी भी नहीं होती।
4. बचाये मोटापे से :-
स्तनपान बढे
हुए कोलेस्ट्रॉल से बचाता है। शिशु जब माँ का दूध पीता है
तो पेट भरते ही उसे असीम तृप्ति का एहसास होता है
जिससे वह आवश्यकता से ज्यादा दूध नहीं
पी पाता जिस कारण शरीर पर अनावश्यक चर्बी नहीं चढ़ती। वहीं बोतल से
दूध पीने वाले बच्चे ज़रूरत से ज्यादा दूध पीते है और मोटापे का शिकार हो जाते है। यह दूध सुपाच्य होता
है मोटापे से बचाता है औरआगे चलकर उसमे रक्त कैंसर ,मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा
कम करता है
5. दूर करे एलर्जी :-
अन्य प्रकार
के दूध या आहार से शिशु अक्सर एलर्जी का शिकार हो जाते है जबकि माँ के दूध में एक नैसर्गिक
गुण है जो बच्चे को एलर्जी से बचाती है। माँ के खान -पान में बदलाव से भले ही दूध के
गंध या रंग में बदलाव हो जाते है लेकिन इससे
शिशु को कभी एलर्जी नहीं होती ।
फीडिंग बनाये माँ को भी सुपर हेल्दी
·
अधिक
कैलोरी के बर्न होने से प्राकृतिक रूप से वज़न
घटता हैऔर मोटापा कम होता है
·
स्तनपान
एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक माना जाता है
·
ऑक्सीटोसिन हार्मोन के स्राव के कारण शरीर को पुनः उसी अवस्था
में लाने में मदद मिलती है जिससे फिटनेस बनी रहती है
·
यह
शिशु के साथ भावनात्मक लगाव पैदा करता है
·
पोस्ट
नेटल डिप्रेसन को दूर करता है
·
मन
को संतुष्टि देता है
·
मिलता
है माँ के शरीर को आराम
·
गर्भाशय के उचित आकार में वापस लाने में मदद करता है
·
स्तनपान
से महिलाओ में स्तन या गर्भाशय के कैंसर का खतरा कम हो जाता है
·
इससे
तनाव कम होता है और प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्रव पर नियंत्रण पाया जा सकता है
·
एनेमिया
के खतरे कम हो जाते है
इन स्थितियों में करे स्तनपान को नज़रअंदाज़
·
यदि
आप टीबी या एड्स जैसी गंभीर बिमारी से पीड़ित
है तो स्तनपान को ना कहे इससे दूध के ज़रिये शिशु तक संक्रमण पहुंच सकता है
·
यदि
किसी विशेष प्रकार की दवा का सेवन कर रहे हो
तो फीडिंग को अवॉयड करे क्योकि दवा से दूध पर असर पड़ सकता है और संक्रमित दूध शिशु के शरीर में प्रवेश कर सकता है
·
फैक्ट्रियो
और उद्योगों आदि में काम करने वाली महिलाओ को स्तनपान से परहेज़ करना चाहिए क्योकि फ़ैक्ट्री
का ज़हरीला धुँआ दूध के माधयम से शिशु के शरीर तक पहुंच सकता है।
·
किसी
भी प्रकार के नशे की स्तिथि में माँ का दूध
ज़हरीला हो जाता है जो बच्चे के शरीर पर प्रतिकूल असर डालता है
माँ
के दूध का किसी अन्य आहार से कोई मुकाबला नहीं। इससे न तो स्तन की सुडौलता या सुंदरता
कम होती है और न ही फिगर में कोई बदलाव आता है।
इसलिए इस मिथक को मन से पूरी तरह निकाल देना चाहिए की स्तनपान शरीर को बेडौल बनाता है। इसके उलट यह शरीर के भीतर एक नैसर्गिक खूबसूरती
लाता है जिससे त्वचा की चमक प्राकृतिक रूप से
बढ़ जाती है . इसलिए निःसंकोच अपने बच्चों को स्तनपान
कराये और उन्हें बीमारियों से दूर रखे।
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